विश्वेशवर मैं ध्यान लगाना भूल गया हूँ .
नहीं नहीं वह तो धीरे धीरे अनजाने ही मुझे छोड गया .
पहले तुम्हारे दर्शन बडी सरलता से और
शीघ्र हो जाते थे ..मन जैसे तुम्हारे आने की तैयारी में
या तुम्हारी निशब्द पद चाप सुनकर चुपचाप रह जाता
था....शून्य !
और तुम आकर एक अद्भुत शांति फैला जाते थे..
तन मन में .
पहले तो उनमुक्त नेत्रों में ध्यान आकर बैठ
जाता था ....किन्तु अब ? अब तो आँखें मूंदते ही तुम
नहीं.....धुंधला संसार आकर घेर लेता है ! लाख प्रयत्न
करने पर भी तुम्हारा मुख नहीं देख पाता ....बडी गहरी
धुंध छा जाती है !
देव ! फिर बुला दो उस ध्यान को !
हाँ तुम स्वयं बलपूर्वक मन में आ जाओ तो आ जायगा
ध्यान भी तुम्हारे पीछे पीछे !
बोलो आओगे बिना बुलाए ?
आ सकोगे ?
नहीं नहीं वह तो धीरे धीरे अनजाने ही मुझे छोड गया .
पहले तुम्हारे दर्शन बडी सरलता से और
शीघ्र हो जाते थे ..मन जैसे तुम्हारे आने की तैयारी में
या तुम्हारी निशब्द पद चाप सुनकर चुपचाप रह जाता
था....शून्य !
और तुम आकर एक अद्भुत शांति फैला जाते थे..
तन मन में .
पहले तो उनमुक्त नेत्रों में ध्यान आकर बैठ
जाता था ....किन्तु अब ? अब तो आँखें मूंदते ही तुम
नहीं.....धुंधला संसार आकर घेर लेता है ! लाख प्रयत्न
करने पर भी तुम्हारा मुख नहीं देख पाता ....बडी गहरी
धुंध छा जाती है !
देव ! फिर बुला दो उस ध्यान को !
हाँ तुम स्वयं बलपूर्वक मन में आ जाओ तो आ जायगा
ध्यान भी तुम्हारे पीछे पीछे !
बोलो आओगे बिना बुलाए ?
आ सकोगे ?
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