निर्मल गगन की पूर्णिम ज्योत्सना से
कण कण में आप्लावित निशा....सुंदर है !
और कज्जल मेघ से अवगुंठित अमा निशा ?
कौन अधिक सुंदर है ?
द्रष्टि को भ्रमकर और कष्टकर , जगत को
बहुरूप-धूमिल करने वाली निस्तब्ध पूर्णिमा ?
या
वह अंधियारी जो समस्त विश्व को एक रूप कर दे ?
और सब में दिखा दे....वही एक रूप .
जो चिरंतन है .
(ज्वर की व्याकुलता में लेखबद्ध)
कण कण में आप्लावित निशा....सुंदर है !
और कज्जल मेघ से अवगुंठित अमा निशा ?
कौन अधिक सुंदर है ?
द्रष्टि को भ्रमकर और कष्टकर , जगत को
बहुरूप-धूमिल करने वाली निस्तब्ध पूर्णिमा ?
या
वह अंधियारी जो समस्त विश्व को एक रूप कर दे ?
और सब में दिखा दे....वही एक रूप .
जो चिरंतन है .
(ज्वर की व्याकुलता में लेखबद्ध)
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