रविवार, 13 अक्टूबर 2013

कोयला

जलते हुए ह्रदय को शीतल सहानुभूति
नहीं चाहिए---उसे चाहिए ज्वलंत प्यार
---------------------प्रेम की ज्वाला !
जलते कोयले को दहकते अंगार को
---------------अग्नि की गोद चाहिए
शीतल जल की r`fIr ugha------सके तो
स्पर्श मात्र से कराह उठेगा वह..ह्रदय
चिटचिटा कर फट जायगा !   और
ज्योतित पिंड के स्थान पर रह
जायगा निर्जीव काला टुकडा ! कोयला !

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