इस सूने ह्रद-पथ पर आओ;
प्रेमी-पंथी मेरे .
मैं राह देखता पडा-पडा ;
निशिदिन साँझ-सवेरे ;
प्रेमी-पंथी मेरे .
मैं राह देखता पडा-पडा ;
निशिदिन साँझ-सवेरे ;
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लगे दुकूल घनेरे.
शुक- पिक घिर-घिर कर आ जाते;
हैं सुगंध के प्रेरे .
प्रियतम जल्दी से आओ तुम
तन-मन-धन-पति मेरे
कुटिल- विचार-भ्रमर ले जाते
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