शनिवार, 24 जनवरी 2015

शुक्र गृह और मन -7-

                     (7)

जाते हो ? अच्छा जाओ ,
               यह निष्ठरता हमने जानी
फिर क्यों ठहरे थे अब तक
               यह सुनने को राम कहानी ?

यह आर्द्र कथा हमारी ,
              अब तुमको है नहीं सुनानी ।
अब मेरा ही दिल होगा ,
              औ ' होगी फिर करुण कहानी ।

         " शुक्र गृह और मन" क्रम 1 से 7 तक में शुक्र गृह
         को देखकर मन में उत्पन्न विचारों को शब्दों में
         पिरोने का प्रयास किया गया है।
          

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