(6)
फिर विस्मृति में मेरी ,
बैरी बसंत का आ जाना
मेरे इस शुष्क ह्र दय पर
क्यों अंगारे बरसा जाना ?
इस दुखी ह्रदय का जलकर ,
फिर से प्यासा हो जाना !
पिउ पिउ की टेर लगाकर ,
हो मिलने को आतुर जाना !
--शेष--
फिर विस्मृति में मेरी ,
बैरी बसंत का आ जाना
मेरे इस शुष्क ह्र दय पर
क्यों अंगारे बरसा जाना ?
इस दुखी ह्रदय का जलकर ,
फिर से प्यासा हो जाना !
पिउ पिउ की टेर लगाकर ,
हो मिलने को आतुर जाना !
--शेष--
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