(5)
पावस तो जाता रहता ,
पर दिखलाता आँख निशाकर ।
किलपाता मुझको पल पल,
मुसका तीखे तीर चलाकर ।
पर करुणा तो दर्शाता ,
अम्बर आँसू बरसा कर ।
फिर करुणा गाल फुलाती ,
मुझ बेचारे को तरसाकर ।
--शेष--
पावस तो जाता रहता ,
पर दिखलाता आँख निशाकर ।
किलपाता मुझको पल पल,
मुसका तीखे तीर चलाकर ।
पर करुणा तो दर्शाता ,
अम्बर आँसू बरसा कर ।
फिर करुणा गाल फुलाती ,
मुझ बेचारे को तरसाकर ।
--शेष--
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