कविता मेरी क्या है मानो,
तुक बेतुक की अजब कहानी.
बक्ङिल बँचक भाषा वाणी,
जोड तंगोरी ऐंचक तानी ..
मानस मेरा मानसरोवर,
विमल भावनाओं का पानी.
प्यास बुझावेगा सबकी ही,
जडमति पिये कि पण्डित Kkनी..
ह्रदय-गगन के भाव-पवन में,
पंख फुलाती उडाती आती.
आत्म o`{k की सन्मति-डाली,
कोयल सम छिप कूक लगाती..
गुन-गुन उसकी कुहू-कुहू सम,
श्रम-हर सुख-रस-धार बहाती.
और दिखाती सत्पथ मुझ को,
जन-सेवा की राह बताती..
तुक बेतुक की अजब कहानी.
बक्ङिल बँचक भाषा वाणी,
जोड तंगोरी ऐंचक तानी ..
मानस मेरा मानसरोवर,
विमल भावनाओं का पानी.
प्यास बुझावेगा सबकी ही,
जडमति पिये कि पण्डित Kkनी..
ह्रदय-गगन के भाव-पवन में,
पंख फुलाती उडाती आती.
आत्म o`{k की सन्मति-डाली,
कोयल सम छिप कूक लगाती..
गुन-गुन उसकी कुहू-कुहू सम,
श्रम-हर सुख-रस-धार बहाती.
और दिखाती सत्पथ मुझ को,
जन-सेवा की राह बताती..
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