एक औरत पैसे के लिए कोठे पर नाचती है ,
अपने अंग वस्त्रों में छुपाती है .
सीमित दायरे में लोगों का मन बहलाती है,
तो वह वैश्या कहलाती है .
समाज में हेय द्रष्टि से देखी जाती है,
लूटी पीटी व प्रताडित की जाती है
नारी समाज पर कलंक व धब्बा कहलाती है
दूसरी औरत पैसे के लिए पर्दे पर नाचती है
वस्त्र उतारती है और अंग दिखाती है
करोडों लोगों का मन बहलाती है
तो नाइका कहलाती है
समाज में पूजी जाती है
पुरुस्क्रत व सम्मानित की जाती है
नारी समाज की पथ प्रदर्शिका कहलाती है
इस समाज ने औरत औरत में ये फर्क क्यों किया है
वो भी तो माँ बहिन या बेटी है
उसने इस रूप को मजबूरी में जिया है....... मजबूरी में जिया है
अपने अंग वस्त्रों में छुपाती है .
सीमित दायरे में लोगों का मन बहलाती है,
तो वह वैश्या कहलाती है .
समाज में हेय द्रष्टि से देखी जाती है,
लूटी पीटी व प्रताडित की जाती है
नारी समाज पर कलंक व धब्बा कहलाती है
दूसरी औरत पैसे के लिए पर्दे पर नाचती है
वस्त्र उतारती है और अंग दिखाती है
करोडों लोगों का मन बहलाती है
तो नाइका कहलाती है
समाज में पूजी जाती है
पुरुस्क्रत व सम्मानित की जाती है
नारी समाज की पथ प्रदर्शिका कहलाती है
इस समाज ने औरत औरत में ये फर्क क्यों किया है
वो भी तो माँ बहिन या बेटी है
उसने इस रूप को मजबूरी में जिया है....... मजबूरी में जिया है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें