सुनो लाल देश के ये माँ तुम्हें पुकारती
जुल्मों से दबी हुई ये दर्द से कराहती .सुनो लाल......
किसी ने छोडा धर्म तो किसी ने संस्कार को
कोई तोडे देश को (तो) कोई माँ के प्यार को
कोइ कोइ लाल देखो दुश्मन संग डोलता
भारत माँ की आबरू को रुपयों से तोलता
सिंदूर पोंछता कोई आंचल कोई नोंचता
लूटता खसोटता है माँ का खून चूसता .सुनो लाल.......
आबरू लुट रही तेरी माँ की देख लाल
( क्या)खून पानी हो गया जो नहीं उसमें उबाल
गहरी नींद सोया है या(कि) तू मदहोश है
बात क्या है मेरे लाल जो तू खामोश है
आत्मा झकझोरती माँ है तुम्हें धिक्कारती
क्रांति की मशाल ले ये माँ तुम्हें पुकारती .सुनो लाल........
जुल्मों से दबी हुई ये दर्द से कराहती .सुनो लाल......
किसी ने छोडा धर्म तो किसी ने संस्कार को
कोई तोडे देश को (तो) कोई माँ के प्यार को
कोइ कोइ लाल देखो दुश्मन संग डोलता
भारत माँ की आबरू को रुपयों से तोलता
सिंदूर पोंछता कोई आंचल कोई नोंचता
लूटता खसोटता है माँ का खून चूसता .सुनो लाल.......
आबरू लुट रही तेरी माँ की देख लाल
( क्या)खून पानी हो गया जो नहीं उसमें उबाल
गहरी नींद सोया है या(कि) तू मदहोश है
बात क्या है मेरे लाल जो तू खामोश है
आत्मा झकझोरती माँ है तुम्हें धिक्कारती
क्रांति की मशाल ले ये माँ तुम्हें पुकारती .सुनो लाल........
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