युवा काल
निरपेक्ष भाव से कूल छोड़
लघु तरी मुझे ले चली दूर,
मैं उत्सुक हो मुँह फेर देख-
ने लगा सकल भावी सुदूर,
भावी की चंचल माया ने,
अद्भुत जादू डाला था ।---स्वयं---
दृष्टि फिरी तो जाना मैंने
ज्योतित थी जल राशिसकल!
मौन लौटने को कहती सी
वह ज्योति मूर्ति क्यों थी निश्चल?
संकेत न समझा क्यों मैने
जब वही बुलाने वाला था ।---स्वयं---
----शेष----------
निरपेक्ष भाव से कूल छोड़
लघु तरी मुझे ले चली दूर,
मैं उत्सुक हो मुँह फेर देख-
ने लगा सकल भावी सुदूर,
भावी की चंचल माया ने,
अद्भुत जादू डाला था ।---स्वयं---
दृष्टि फिरी तो जाना मैंने
ज्योतित थी जल राशिसकल!
मौन लौटने को कहती सी
वह ज्योति मूर्ति क्यों थी निश्चल?
संकेत न समझा क्यों मैने
जब वही बुलाने वाला था ।---स्वयं---
----शेष----------
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