रविवार, 18 मई 2014

याद कितनी आ रही है

                  याद कितनी आ रही है !

मुख- मधुरिमा वह कि ज्यों
नभ में छिटकती चांदनी है,
और वह विहँसन ,कि सकुची
लाज   से   मंदाकिनी    है,
                आज खोये से ह्रदय में
                हूक बन तड़पा रही है।---याद

वे अधर रक्तिम कि जिन पर
झूमती    वाणी    ठिठकती ,
चिर   नई  मुस्कान जिनको
चूमने   आती    ललकती ,
             प्यार की वह बात पहली,
            गीत बनकर छा  रही  है ।---याद

नैन  निर्मल-नील  नभ  से
और कितनी विशद चितवन,
दो नयन बस दो नयन वे
देखता  है  आज   जीवन ,
             पी लिया पीयूष फिर भी
             प्यास बढ़ती जा रही है ।---याद

मिलन की पहली घड़ी वह
और पहला मधुर चुम्बन ,
याद फिर फिर आ रहे हैं
आज मादक बाहु-बन्धन,
            बाट निरखूँ प्रतिक्षण क्या
             फिर घड़ी वह आ रही है ?---याद

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