गीत कितने गा चुका मैं !
विस्मरण के गहनतम में
खो चुकीं कितनी कथाएँ
पर चमक उठतीं कहीं से
परचिता सी कुछ व्याथाएँ
नग्न नर्तन के लिए जब मचलती थी वेदनाएँ
कौन जानेगा कि तब मन
किस तरह समझा चुका मैं ? गीत----
व्यथित जग की चिरव्यथाओं
में रहा है साथ मेरा
विश्व की मुस्कान के संग
गूँज उठता हास्य मेरा
अपरचित अज्ञात ही जब घुल रहा अस्तित्व मेरा
व्यर्थ तब ये प्रश्न कितने
अश्रु कण बरसा चुका मैं ? गीत -----
बंद उर के व्दार थे ये
शांत मन का था अँधेरा
हठ किसा का देखकर ही
खुल गया हर व्दार मेरा
क्यों भला देखूँ किसने मुँह इधर से आज फेरा
क्या करूँगा याद करके
प्यार कितना पा चुका मैं ? गीत----
शून्य तमि में स्वर जगाकर
शून्य के अँग अँग सजाकर
क्रूर किसके कर अरे ये
जो उन्हें भी खींच लाये
जग उठी अभिलाष फिर से आज सुन तो कोई जाये
गीत कब से गा रहा हूँ
और कितने गा चुका मैं ? गीत ----
विस्मरण के गहनतम में
खो चुकीं कितनी कथाएँ
पर चमक उठतीं कहीं से
परचिता सी कुछ व्याथाएँ
नग्न नर्तन के लिए जब मचलती थी वेदनाएँ
कौन जानेगा कि तब मन
किस तरह समझा चुका मैं ? गीत----
व्यथित जग की चिरव्यथाओं
में रहा है साथ मेरा
विश्व की मुस्कान के संग
गूँज उठता हास्य मेरा
अपरचित अज्ञात ही जब घुल रहा अस्तित्व मेरा
व्यर्थ तब ये प्रश्न कितने
अश्रु कण बरसा चुका मैं ? गीत -----
बंद उर के व्दार थे ये
शांत मन का था अँधेरा
हठ किसा का देखकर ही
खुल गया हर व्दार मेरा
क्यों भला देखूँ किसने मुँह इधर से आज फेरा
क्या करूँगा याद करके
प्यार कितना पा चुका मैं ? गीत----
शून्य तमि में स्वर जगाकर
शून्य के अँग अँग सजाकर
क्रूर किसके कर अरे ये
जो उन्हें भी खींच लाये
जग उठी अभिलाष फिर से आज सुन तो कोई जाये
गीत कब से गा रहा हूँ
और कितने गा चुका मैं ? गीत ----
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