दीपे !
तुम्हारे स्वागत में क्या जलाऊँ ?
हर बार तुम आती हो
और मैं दीप जलाना भूल जाता हूँ ?
खैर,अब आना तो एक बात याद रखना
इस मन में एक शाश्वत ज्योति छोड जाना
जो सतत सभी के स्वागत के मार्ग में
स्निग्ध प्रकाश बिछाती रहे !
तब तुम्हें यहाँ से निराश हो कर
लौटना न पडेगा !
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