मन में कसक यही जाता है ,
तुमने मुझे नहीं पहचाना ।
तुम मेरी साकार कल्पना,
मन की मूर्तिमन्त अभिलाषा,
केन्द्र बिन्दु सूने जीवन की ,
मधुर चिरन्तन मेरी आशा ,
शान्त तुम्हें पाकर हो पाई ,
विकल युगों की अथक पिपासा,
मूक ह्रदय की निश्वासों की ,
तुम हो एक अनूठी भाषा ,
चिरसंगी तुम जीवन साथी,
किन्तु न मेरा परिचय जाना ! ---मन में--
कंटक पथ में सदा तुम्हारे,
मैंने चुन-चुन सुमन बिछाये,
तिमिर-कुञ्ज आलोकित करने,
जगमग जुगनू दीप जलाये ,
सहज तुम्हारे स्वागत ही में,
पग-पग बंदनवार सजाये ,
भीगे उलझे हुए स्वरों में ,
गीत अनेकों मैंने गाए ,
गीतों की आराध्य देवि तुम !
पर न व्यथा का स्वर पहचाना ! --मन में---
---शेष---
तुमने मुझे नहीं पहचाना ।
तुम मेरी साकार कल्पना,
मन की मूर्तिमन्त अभिलाषा,
केन्द्र बिन्दु सूने जीवन की ,
मधुर चिरन्तन मेरी आशा ,
शान्त तुम्हें पाकर हो पाई ,
विकल युगों की अथक पिपासा,
मूक ह्रदय की निश्वासों की ,
तुम हो एक अनूठी भाषा ,
चिरसंगी तुम जीवन साथी,
किन्तु न मेरा परिचय जाना ! ---मन में--
कंटक पथ में सदा तुम्हारे,
मैंने चुन-चुन सुमन बिछाये,
तिमिर-कुञ्ज आलोकित करने,
जगमग जुगनू दीप जलाये ,
सहज तुम्हारे स्वागत ही में,
पग-पग बंदनवार सजाये ,
भीगे उलझे हुए स्वरों में ,
गीत अनेकों मैंने गाए ,
गीतों की आराध्य देवि तुम !
पर न व्यथा का स्वर पहचाना ! --मन में---
---शेष---
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