लो वे आँखे मचल गईं ।
रक्तिम मदिरा छलक पड़ी सी,
तृषित हृदय में बरस पड़ी सी,
विस्मित मैं वे तुहिन बिन्दु सी
तृण पल्लव में बिखर गईं ।
नाच उठा मानव का यौवन ,
थिरके तन मन में जड़ चेतन
तानें जाग उठी प्राणों में
लो रस बूँदें बरस गईं।
लहर लहर आशा अंगड़ाई
नभ का मुख चुम्बन कर आई
मन को रोका रुक न सका वह
फिर ये आँखें मचल गईं ।
रक्तिम मदिरा छलक पड़ी सी,
तृषित हृदय में बरस पड़ी सी,
विस्मित मैं वे तुहिन बिन्दु सी
तृण पल्लव में बिखर गईं ।
नाच उठा मानव का यौवन ,
थिरके तन मन में जड़ चेतन
तानें जाग उठी प्राणों में
लो रस बूँदें बरस गईं।
लहर लहर आशा अंगड़ाई
नभ का मुख चुम्बन कर आई
मन को रोका रुक न सका वह
फिर ये आँखें मचल गईं ।
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