रविवार, 2 फ़रवरी 2014

-:जीवन:-

यह जीवन एक कहानी है ,
               जो बिखरी जग के कण-कण में ।
जिसका ओर न छोर कहीं है ,
               जो बढती  जाती  छण-छण  में ।
यह जीवन सुंदर वीणा है ,
               जो  तुम्हें  बजाना  ही  होगी ।
सब जगती की सुध बिसराकर ,
              यह तुम्हें  सुनाना  ही  होगी ।
यह जीवन लम्बी एक सफर ,
              युग-युग तक चलते जाना है ।
धर्म- अधर्म दो मार्ग दीर्घ ,
              बस उन पर  बढते  जाना  है ।
इक पाप-पुण्य की गठरी ही ,
              हर दम साथ  तुम्हारा  देगी ।
बस राम- नाम की ही लाठी ,
              तुमको 'उस' तक पहुँचा देगी ।
यह जीवन गूढ़ समस्या है ,
              जिसको सुलझाना  ही  होगा ।
जन्म-जन्म के बाद सही पर ,
              मोक्ष तुम्हें  पाना  ही  होगा ।













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