हम तुम सब ही फंसे हुए हैं जीवन के संग्राम में
फिर भी याद किया सबने ऐसी भागम भाग में
मधुमय सहज सरस शब्दों से पाती में प्यार भरा
हर्षित हुआ हर इक मन याद आया हर पल गुजरा
दिल के किसी कोने में यूं ही जगह बना रखना
यूं ही कुछ बूंदें पाती की आ जायें बन के झरना
चलें शब्द यूं कदमों से और यूं आपस में बातें हों
जीवन संकट कट जाते हैं जब शब्दों का सम्बल हो
चंद शब्दों की लडियां मैं भी मन से प्रेषित करता हूँ
स्वीकार करो हे मान्यवर ये तुमको अर्पण करता हूँ
फिर भी याद किया सबने ऐसी भागम भाग में
मधुमय सहज सरस शब्दों से पाती में प्यार भरा
हर्षित हुआ हर इक मन याद आया हर पल गुजरा
दिल के किसी कोने में यूं ही जगह बना रखना
यूं ही कुछ बूंदें पाती की आ जायें बन के झरना
चलें शब्द यूं कदमों से और यूं आपस में बातें हों
जीवन संकट कट जाते हैं जब शब्दों का सम्बल हो
चंद शब्दों की लडियां मैं भी मन से प्रेषित करता हूँ
स्वीकार करो हे मान्यवर ये तुमको अर्पण करता हूँ